Our Projects

GNF के प्रमुख प्रोजेक्ट — ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और युवाओं के लिए

Flagship Projects

GNF के प्रमुख प्रोजेक्ट

हर क्षेत्र में ऊर्जावान युवाओं को जागरूक बनाने और गाँव-गाँव तक आत्मनिर्भरता पहुँचाने की हमारी पहलें।

बिज़नेस चैम्पियन — अब गाँव के युवा बनेंगे, मिशन 2026/2027 का बैनर
मिशन 2026/27

बिजनेस चैम्पियन — अब गाँव के युवा बनेंगे

हर क्षेत्र में ऊर्जावान युवाओं को जागरूक बनाने की रोजगार पहल में उद्यमी बनाने की पहल। (मिशन 2026/2027)

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गोबर गैस योजना — जागता भारत, गौधन क्रांति का बैनर
वेस्ट टू वेल्थ

गौधन से गोबर गैस योजना

रसोई गैस हो या खाद से लेकर बिजली की किल्लत खत्म करेगी गौधन से गोबर गैस योजना — अब किल्लत नहीं।

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GNF प्रोजेक्ट — आओ चलें नए भारत की ओर का बैनर
नेशन बिल्डिंग

GNF प्रोजेक्ट — आओ चलें नए भारत की ओर

गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन के प्रमुख प्रोजेक्ट और जनकल्याण की पहलें।

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उद्यमी विकास योजना जनकल्याण केंद्र — NGO MSME Regd. बैनर
MSME पंजीकृत

उद्यमी विकास योजना — जनकल्याण केंद्र

NGO · MSME पंजीकृत — स्वरोज़गार, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की योजना।

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Waste to Wealth, Simplified

गोबर गैस योजना कैसे काम करती है

तीन सरल चरण जो गौधन को स्वच्छ ऊर्जा, उपजाऊ मिट्टी और ग्रामीण आय में बदलते हैं।

गौधन से ऊर्जा

खाना पकाने के लिए स्वच्छ, धुआं रहित गोबर गैस (बायोगैस) और जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाली नाडेप कम्पोस्ट खाद।

पर्यावरण एवं बागवानी

आम, सहजन, नीम और जामुन की बागवानी — जमीन की सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी।

वैल्यू-एडेड उत्पाद

गोकाष्ठ, धूपबत्ती-अगरबत्ती, दिये और जैविक कीटनाशक — गौधन के कचरे से ग्रामीण रोजगार तक।

Waste to Wealth

गौधन से रसोई गैस एवं खाद — गोबर गैस योजना

गौधन से रसोई गैस एवं जमीनी उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाली नाडेप कम्पोस्ट गोबर खाद के विकल्प दिखाए गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन ने।

जमीनी उर्वरा शक्ति विकास एवं पर्यावरण हितैषी आम, सहजन, नीम, जामुन बागवानी योजना को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

गाय गोबर से विभिन्न उत्पाद निर्माण पर जोर — गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है। गौधन और जैविक खेती के माध्यम से आत्मनिर्भरता की इस योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

गोबर गैस योजना का बैनर — जागता भारत, गौधन क्रांति

गोबर गैस (Biogas): रसोई गैस के विकल्प के रूप में गोबर गैस का उपयोग न केवल ईंधन के खर्च को कम करता है, बल्कि यह धुआं रहित स्वच्छ ईंधन प्रदान कर स्वास्थ्य की भी रक्षा करता है।

नाडेप कम्पोस्ट (NADEP Compost): कम गोबर में अधिक और उच्च गुणवत्ता वाली खाद बनाने की यह विधि जमीन की उर्वरा शक्ति को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है। यह रासायनिक खादों पर निर्भरता खत्म करने का एक सशक्त माध्यम है।

फाउंडेशन ने जमीन की सेहत और पर्यावरण सुधार के लिए विशिष्ट पौधों के रोपण पर जोर दिया है:

सहजन (Drumstick): यह एक ‘सुपरफूड’ है जो पोषण के साथ-साथ आय का स्रोत भी बनता है।

नीम और जामुन: नीम जहां प्राकृतिक कीटनाशक और औषधि का काम करता है, वहीं जामुन जैव-विविधता और फल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।

आम की बागवानी: यह किसानों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक लाभ सुनिश्चित करती है।

सिर्फ खाद तक सीमित न रहकर, गाय के गोबर से विभिन्न उत्पाद बनाकर ग्रामीण रोजगार पैदा किया जा सकता है:

गोकाष्ठ (Lumber from Cow Dung): दाह संस्कार या हवन के लिए लकड़ी के विकल्प के रूप में।

धूपबत्ती और अगरबत्ती: रसायनों से मुक्त और वातावरण को शुद्ध करने वाली।

दिये और मूर्तियाँ: त्योहारों के समय पर्यावरण अनुकूल विकल्पों के रूप में।

जैविक कीटनाशक: जीवामृत और पंचगव्य जैसे उत्पादों के माध्यम से खेती की लागत घटाना।

निष्कर्ष: गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन का यह मॉडल “वेस्ट टू वेल्थ” (कचरे से कंचन) के सिद्धांत पर आधारित है। यह न केवल आवारा पशुओं की समस्या का समाधान करता है, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने और धरती को बंजर होने से बचाने में भी सहायक है।

हमारे काम की झलक

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