हमारे प्रोजेक्ट

GNF के प्रमुख प्रोजेक्ट — ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और युवाओं के लिए

प्रमुख प्रोजेक्ट

GNF के प्रमुख प्रोजेक्ट

हर क्षेत्र में ऊर्जावान युवाओं को जागरूक बनाने और गाँव-गाँव तक आत्मनिर्भरता पहुँचाने की हमारी पहलें।

बिज़नेस चैम्पियन — अब गाँव के युवा बनेंगे, मिशन 2026/2027 का बैनर
मिशन 2026/27

बिजनेस चैम्पियन — अब गाँव के युवा बनेंगे

हर क्षेत्र में ऊर्जावान युवाओं को जागरूक बनाने की रोजगार पहल में उद्यमी बनाने की पहल। (मिशन 2026/2027)

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गोबर गैस योजना — जागता भारत, गौधन क्रांति का बैनर
वेस्ट टू वेल्थ

गौधन से गोबर गैस योजना

रसोई गैस हो या खाद से लेकर बिजली की किल्लत खत्म करेगी गौधन से गोबर गैस योजना — अब किल्लत नहीं।

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GNF प्रोजेक्ट — आओ चलें नए भारत की ओर का बैनर
नेशन बिल्डिंग

GNF प्रोजेक्ट — आओ चलें नए भारत की ओर

गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन के प्रमुख प्रोजेक्ट और जनकल्याण की पहलें।

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उद्यमी विकास योजना जनकल्याण केंद्र — NGO MSME Regd. बैनर
MSME पंजीकृत

उद्यमी विकास योजना — जनकल्याण केंद्र

NGO · MSME पंजीकृत — स्वरोज़गार, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की योजना।

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मोरनी हिल्स — महिला कारीगर पंचायत: तुमसा कोई और नहीं, युवा हौसलों की आवाज़ (संकल्प चित्र)
मोरनी हिल्स

मोरनी हिल्स — महिला कारीगर पंचायत

मोरनी हिल्स की महिला कारीगरों की पंचायत — स्थानीय हुनर, स्वरोज़गार और ‘युवा हौसलों की आवाज़’।

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आत्मनिर्भर रोजगार हब: मास्टर प्लान 2031 — गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन (GNF) का संकल्प चित्र (प्रस्तावित)
प्रस्तावित · 2031

आत्मनिर्भर रोजगार हब: मास्टर प्लान 2031

नाडेप कम्पोस्ट व जैविक कृषि हब तथा हाइड्रोजन व स्वच्छ ऊर्जा हब — गाँव, रोज़गार और पर्यटन को जोड़ने का GNF का संकल्प चित्र (प्रस्तावित)।

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नैतिक विद्यालय का वैकल्पिक मार्ग — गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन: गौधन सेवा, पर्यावरण व जल नीति केंद्र, जल है तो कल है
जल एवं गौधन

नैतिक विद्यालय का वैकल्पिक मार्ग

गौधन सेवा, पर्यावरण व जल नीति केंद्र — ‘जल है तो कल है’: जल की बचत, आपसी सहमति से जल निधि का प्रबंधन और गौधन की सेवा।

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नैतिक ज्योति जल निधि एवं नाडेप कम्पोस्ट प्रयास से वैकल्पिक चेतना मार्ग — गांधी जयंती प्रेरणा से भारतरत्न नंदा स्मृति में महा संकल्प (संकल्प चित्र)
अल नीनो अभियान

नैतिक ज्योति जल निधि एवं नाडेप कम्पोस्ट प्रयास से वैकल्पिक चेतना मार्ग

जल निधि और नाडेप कम्पोस्ट — गांधी जयंती की प्रेरणा से भारतरत्न नंदा स्मृति में महा संकल्प।

संभावना मार्ग — बाढ़ का पानी संग्रह और जमीन में रिचार्ज: दस लाख चेक डैम, तालाब, पोखर, कुएँ भरण (संकल्प चित्र)
अल नीनो अभियान

संभावना मार्ग — बाढ़ का पानी संग्रह, जमीन में रिचार्ज

अनन्य झलक — लोक चेतना के तहत प्रकृति के साथ विकास की ज़रूरतमंद तस्वीर: बाढ़ के पानी का संग्रह और ज़मीन में रिचार्ज।

अल नीनो संकट के विरुद्ध जागृत समाज — ‘चेतना मार्ग’: वैकल्पिक मार्ग व सोशल रेजिमेंट फोर्स (भारत सेवक) (संकल्प चित्र)
अल नीनो अभियान

अल नीनो संकट के विरुद्ध जागृत समाज — ‘चेतना मार्ग’

गाद हटाओ-तालाब जगाओ, वर्टिकल फ़ॉरेस्ट और हरियाली, सूरज-पवन से बिजली, और एक यूनिट बिजली-एक बूंद पानी की बचत — भारत सेवक बनकर धरोहर बचाएँ।

वेस्ट टू वेल्थ, सरल शब्दों में

गोबर गैस योजना कैसे काम करती है

तीन सरल चरण जो गौधन को स्वच्छ ऊर्जा, उपजाऊ मिट्टी और ग्रामीण आय में बदलते हैं।

गौधन से ऊर्जा

खाना पकाने के लिए स्वच्छ, धुआं रहित गोबर गैस (बायोगैस) और जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाली नाडेप कम्पोस्ट खाद।

पर्यावरण एवं बागवानी

आम, सहजन, नीम और जामुन की बागवानी — जमीन की सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी।

वैल्यू-एडेड उत्पाद

गोकाष्ठ, धूपबत्ती-अगरबत्ती, दिये और जैविक कीटनाशक — गौधन के कचरे से ग्रामीण रोजगार तक।

वेस्ट टू वेल्थ

गौधन से रसोई गैस एवं खाद — गोबर गैस योजना

गौधन से रसोई गैस एवं जमीनी उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाली नाडेप कम्पोस्ट गोबर खाद के विकल्प दिखाए गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन ने।

जमीनी उर्वरा शक्ति विकास एवं पर्यावरण हितैषी आम, सहजन, नीम, जामुन बागवानी योजना को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

गाय गोबर से विभिन्न उत्पाद निर्माण पर जोर — गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है। गौधन और जैविक खेती के माध्यम से आत्मनिर्भरता की इस योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

गोबर गैस योजना का बैनर — जागता भारत, गौधन क्रांति

गोबर गैस (Biogas): रसोई गैस के विकल्प के रूप में गोबर गैस का उपयोग न केवल ईंधन के खर्च को कम करता है, बल्कि यह धुआं रहित स्वच्छ ईंधन प्रदान कर स्वास्थ्य की भी रक्षा करता है।

नाडेप कम्पोस्ट (NADEP Compost): कम गोबर में अधिक और उच्च गुणवत्ता वाली खाद बनाने की यह विधि जमीन की उर्वरा शक्ति को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है। यह रासायनिक खादों पर निर्भरता खत्म करने का एक सशक्त माध्यम है।

फाउंडेशन ने जमीन की सेहत और पर्यावरण सुधार के लिए विशिष्ट पौधों के रोपण पर जोर दिया है:

सहजन (Drumstick): यह एक ‘सुपरफूड’ है जो पोषण के साथ-साथ आय का स्रोत भी बनता है।

नीम और जामुन: नीम जहां प्राकृतिक कीटनाशक और औषधि का काम करता है, वहीं जामुन जैव-विविधता और फल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।

आम की बागवानी: यह किसानों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक लाभ सुनिश्चित करती है।

सिर्फ खाद तक सीमित न रहकर, गाय के गोबर से विभिन्न उत्पाद बनाकर ग्रामीण रोजगार पैदा किया जा सकता है:

गोकाष्ठ (Lumber from Cow Dung): दाह संस्कार या हवन के लिए लकड़ी के विकल्प के रूप में।

धूपबत्ती और अगरबत्ती: रसायनों से मुक्त और वातावरण को शुद्ध करने वाली।

दिये और मूर्तियाँ: त्योहारों के समय पर्यावरण अनुकूल विकल्पों के रूप में।

जैविक कीटनाशक: जीवामृत और पंचगव्य जैसे उत्पादों के माध्यम से खेती की लागत घटाना।

निष्कर्ष: गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन का यह मॉडल “वेस्ट टू वेल्थ” (कचरे से कंचन) के सिद्धांत पर आधारित है। यह न केवल आवारा पशुओं की समस्या का समाधान करता है, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने और धरती को बंजर होने से बचाने में भी सहायक है।

हमारे काम की झलक

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