Krishnaraj Arun
- Foremost disciple of Bharat Ratna Gulzarilal Nanda Ji
- National Executive Vice-President, NAI
- Editor, Country & Politics Magazine — Delhi & Chandigarh

नैतिकता, पारदर्शिता और सेवा के संकल्प के साथ संस्था का मार्गदर्शन करने वाले पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य एवं सलाहकार।

Grandson of Ex PM G.L. Nanda Ji
Peethadheeshwar, Parmarth Ashram, Rishikesh
Actress & Social Worker
Guthliman (Environmental)
Educationist
गौ धन विकास — नाडेप कम्पोस्ट खाद
Actress & Model, Mumbai
President, Youth Wing (IT Sector), Noida
Senior Journalist, Dainik Saamana, Mumbai
Social Worker, President of Gaushala, Alwar Rural Area
Former President of India
Former Chief Justice of India
Former Chief Justice of India
Former Chief Justice, Madhya Pradesh
Former President, Madhya Pradesh State Bar Council, Jabalpur
सदस्य
Former Prime Minister of India
Former Governor
Former Governor
Former Governor
Former Member of Parliament
Former Indian Cricketer
यह प्रतिष्ठान राष्ट्र में नैतिक मूल्यों की स्थापना, सामाजिक चेतना के विस्तार और भारतीय सांस्कृतिक विचारधारा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्थापित एक सामाजिक एवं वैचारिक संगठन है।
संगठन का विश्वास है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति केवल भौतिक विकास से नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मजबूती से संभव होती है। हमारा उद्देश्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से लागू कराना और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
भारत रत्न गुलज़ारीलाल नंदा जी की 128वीं जयंती 4 जुलाई से आरंभ — समाज एवं राष्ट्र उत्थान की दिशा में हमारी ताज़ा पहलें।
हमारा मिशन देश में नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक जागरूकता को सुदृढ़ करना है। इसके अंतर्गत आदर्श एवं संस्कारयुक्त शिक्षा को बढ़ावा देना, प्रतिभाशाली युवाओं को हुनर आधारित अवसरों से जोड़ना तथा राष्ट्र की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति हेतु स्वैच्छिक योजनाओं का संचालन करना शामिल है। हम जनहितकारी सरकारी योजनाओं को नैतिक समर्थन प्रदान करने, सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जनजागरण करने, भारतीय चिकित्सा पद्धतियों, जैविक खेती, गौधन संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सतत प्रयास करते हैं। साथ ही, हम राष्ट्र सेवा में समर्पित व्यक्तियों को सम्मानित कर प्रेरणा का वातावरण निर्मित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
और पढ़ेंहमारी दृष्टि एक ऐसे सशक्त और नैतिक भारत का निर्माण करना है जहाँ राष्ट्रीय मूल्य, सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय संवेदनाएँ समाज के प्रत्येक स्तर पर स्थापित हों। हम ऐसा राष्ट्र देखना चाहते हैं जहाँ स्वतंत्रता आंदोलन के महान आदर्श आज की पीढ़ी का मार्गदर्शन करें और युवा वर्ग संस्कार, शिक्षा और सेवा भावना से युक्त होकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दे। हमारा लक्ष्य एक ऐसे समाज की स्थापना है जहाँ प्रतिभा को सम्मान मिले, नैतिकता को प्राथमिकता दी जाए और भारतीय संस्कृति की गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे।
और पढ़ेंरोज़गार, कौशल, गौधन और पर्यावरण — ज़मीनी स्तर पर आत्मनिर्भरता की छह प्रमुख पहलें।
युवाओं को व्यावसायिक, तकनीकी और प्रबंधन कौशल का प्रशिक्षण।
विवरण देखेंसहयोगी संस्थाओं के साथ जलसंरक्षण और गांव आधारित उद्यम विकास।
विवरण देखेंगौधन आधारित जैविक व उपयोगी उत्पादों का निर्माण कर ग्रामीण आय को बढ़ावा।
विवरण देखेंस्थानीय नागरिकों, महिलाओं और युवाओं को स्वरोज़गार एवं उद्यमिता के लिए मार्गदर्शन व सहयोग।
विवरण देखेंछत व खाली भूमि में औषधीय पौधों से रोजगार के अवसर।
विवरण देखेंप्रतिभाशाली युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोज़गार से जोड़ना।
विवरण देखेंमोरनी हिल्स से लेकर मास्टर प्लान 2031 तक — गाँव, रोज़गार, जल और ऊर्जा को जोड़ने की GNF की ताज़ा पहलें।

मोरनी हिल्स की महिला कारीगरों की पंचायत — स्थानीय हुनर, स्वरोज़गार और ‘युवा हौसलों की आवाज़’।
सभी प्रोजेक्ट
नाडेप कम्पोस्ट व जैविक कृषि हब तथा हाइड्रोजन व स्वच्छ ऊर्जा हब — GNF का संकल्प चित्र (प्रस्तावित)।
विवरण देखें
Country & Politics में प्रकाशित — हरियाणा के मोरनी हिल्स को आदर्श पर्यटन योग्य बनाने की गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन की पहल।
प्रेस गैलरी
गौधन सेवा, पर्यावरण व जल नीति केंद्र — ‘जल है तो कल है’: जल की बचत, जल निधि का प्रबंधन और गौधन की सेवा।
विवरण देखेंगुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन का देशव्यापी ‘अलख जगाओ — अल नीनो से विनाश बचाओ’ अभियान — गांधी जयंती से प्रेरित होकर भारतरत्न नंदा स्मृति में महा अभियान प्रयोग की झलक।
अल नीनो (El Niño) की वैज्ञानिक रिपोर्ट को लेकर गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन (GNF) ने गंभीर चिंतन दिखाते हुए कहा है कि यदि अभी से अच्छे प्रयास नहीं हुए, तो क्या गंभीर स्थितियाँ बनेंगी?
सामूहिक सहयोग के आधार पर कदम उठाए गए हैं — ‘नैतिक ज्योति अभियान’ के तहत जन-जागरण एवं प्रयोग अभियान।

जल निधि और नाडेप कम्पोस्ट — गांधी जयंती की प्रेरणा से भारतरत्न नंदा स्मृति में महा संकल्प।

Value Based Nation Building
भारतरत्न नंदा नैतिक ‘ज्योति’
सदाचार के ध्वजः पूर्व पीएम भारतरत्न नंदा जी के गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन के चेयरमैन एवं नंदा जी के परम शिष्य श्री कृष्णराज जी अरुण द्वारा प्रस्तावित वैल्यू-बेस्ड मिशन — ‘नैतिक ज्योति’ — राष्ट्र के लिए समाज के नव जागरण के मायने।
सदाचार के प्रतीक, भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री गुलज़ारीलाल नंदा जी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए फाउंडेशन द्वारा प्रस्तावित ‘वैल्यू-बेस्ड मिशन: नैतिक ज्योति’ राष्ट्र के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है।
यह मिशन समाज में नैतिक पुनर्जागरण (Social Reawakening) के लिए एक नई मशाल की तरह है।
पाँच स्तंभ — चुनकर पढ़ें
‘नैतिक ज्योति’ का मुख्य उद्देश्य समाज में भटकती हुई युवा पीढ़ी को नैतिकता के रास्ते पर लाना और गांधीवादी मूल्यों को भारत के प्रत्येक स्वतन्त्रता सेनानी के त्याग और बलिदान के महत्व को पुनर्जीवित करना है। भारतरत्न नंदा जी ने सदाचार की मशाल जलाई थी, और यह मिशन उसी नैतिकता के सिद्धांतों को राष्ट्र के मूल में स्थापित करना चाहता है।
यह मिशन केवल राजनीति नहीं, बल्कि समाज की उन्नति का एक समग्र प्रयास है। इसमें नैतिक आदर्श विद्यालयों की स्थापना, हुनरबाज प्रतिभाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जनचेतना जगाना शामिल है।
नंदा जी “वंश विहीन राजनीति” और “सफेद कपड़ों वाले संत” के रूप में जाने जाते थे। उनका मानना था कि राष्ट्र की उन्नति केवल भौतिक नहीं, बल्कि नैतिक आधार पर होनी चाहिए। ‘नैतिक ज्योति’ का अर्थ है – भ्रष्टाचार मुक्त, ईमानदार और कर्तव्यपरायण शासन व्यवस्था की ओर बढ़ना।
गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन का ‘नैतिक ज्योति’ मिशन सिर्फ वैचारिक नहीं, व्यावहारिक भी है। यह गाय के गोबर से उत्पाद (गोकाष्ठ, अगरबत्ती) और जैविक खेती (जैविक राज्य) को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखता है, जिसे “कचरे से कंचन” (Waste to Wealth) कहा गया है।
यह पहल भारत सरकार और राज्यों की योजनाओं में जनहित के कार्यों को नैतिक बल प्रदान करती है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक ईमानदारी से पहुँच सके।
निष्कर्ष: ‘नैतिक ज्योति’ मिशन का अर्थ है — भारत को न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि चारित्रिक रूप से भी एक सशक्त राष्ट्र बनाना। यह नंदा जी की विरासत को सहेजते हुए, एक ईमानदार और समृद्ध भारत के निर्माण का आह्वान है।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (KUK) के तत्वावधान में यहाँ “श्री गुलज़ारी लाल नंदा नीतिशास्त्र, दर्शनशास्त्र केंद्र, संग्रहालय एवं पुस्तकालय” संचालित किया जाता है।
GNF प्रोजेक्ट ग्रामदूत योजना: भारतरत्न नंदा जी की 128वीं जयंती 4 जुलाई से आरंभ।
मोरनी हिल्स (हरियाणा) एवं यूपी में राजा परीक्षित गढ़ व गढ़मुक्तेश्वर तीर्थ क्षेत्र में ग्राम दूत योजना से समग्र विकास अभियान पहल।
भूरेवाला–चंडीगढ़ हाइवे प्रोजेक्ट में गौधन, गोबर उत्पाद एवं आयुर्वेदिक हर्बल योजना।
गुरुपूर्णिमा महापर्व 29 जुलाई 2026 से उप केंद्र: गुलज़ारीलाल नंदा सदाचार केंद्र।
रसोई गैस हो या खाद से लेकर बिजली की किल्लत — खत्म करेगी गौधन से गोबर गैस योजना, अब किल्लत नहीं।
गौधन से रसोई गैस एवं जमीनी उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाली नाडेप कम्पोस्ट गोबर खाद के विकल्प दिखाए गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन ने। जमीनी उर्वरा शक्ति विकास एवं पर्यावरण हितैषी आम, सहजन, नीम, जामुन बागवानी योजना को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
30 जुलाई 2004 को राष्ट्रपति भवन में गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन का विशेष सम्मान समारोह आयोजित हुआ।
तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने श्री पी. के. माधवन को फाउंडेशन द्वारा दिए जाने वाले प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय सदाचार पुरस्कार’ (नैतिक सम्मान) से सम्मानित किया।
इसी समारोह में भारत के पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) श्री एन. विट्ठल (Nagarajan Vittal) को भी ‘राष्ट्रीय सदाचार पुरस्कार’ (National Ethical Award) से सम्मानित किया गया।
फाउंडेशन के तत्कालीन सलाहकार बोर्ड अध्यक्ष, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. एस. वर्मा भी समारोह में उपस्थित थे।
Sustainable Development Goals की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता।






समाचार पत्रों में गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन
देश के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित संस्था की खबरों की कतरनें। किसी भी कतरन पर क्लिक करके उसे बड़ा करके पढ़ें।

गुलज़ारीलाल नंदा भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, सच्चे गांधीवादी और नैतिक मूल्यों पर आधारित राजनीति के प्रतीक थे। वे सादगी, ईमानदारी और सेवा-भाव के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।
गुलज़ारीलाल नंदा का जन्म 4 जुलाई 1898 को सियालकोट (तत्कालीन ब्रिटिश भारत, वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और प्रारंभ में शिक्षक के रूप में कार्य किया। बाद में वे महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए।
नंदा जी ने असहयोग आंदोलन और अन्य राष्ट्रीय आंदोलनों में सक्रिय भाग लिया। इस दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। वे सदैव अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलते रहे।
स्वतंत्रता के बाद वे भारत सरकार में श्रम एवं रोजगार मंत्री बने। श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक न्याय और कल्याण के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण नीतियाँ बनाईं।
वे दो बार भारत के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने — 1964 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद तथा 1966 में लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद।
प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च पद पर रहते हुए भी उन्होंने सत्ता की लालसा नहीं की। उनका जीवन अत्यंत सरल, अनुशासित और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण था।
उन्हें 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 15 जनवरी 1998 को उनका निधन हुआ।
गुलज़ारीलाल नंदा का जीवन भारतीय राजनीति में नैतिकता, सेवा और त्याग का प्रेरणास्रोत माना जाता है।