हमारे बारे में

हमारे बारे में — गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन

परिचय

गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन

यह प्रतिष्ठान राष्ट्र में नैतिक मूल्यों की स्थापना, सामाजिक चेतना के विस्तार और भारतीय सांस्कृतिक विचारधारा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्थापित एक सामाजिक एवं वैचारिक संगठन है।

संगठन का विश्वास है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति केवल भौतिक विकास से नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मजबूती से संभव होती है। आज जब समाज तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है, तब नैतिक मूल्यों का क्षरण, सामाजिक असंतुलन और युवा पीढ़ी का दिशाहीन होना एक गंभीर चुनौती बन चुका है। ऐसे समय में यह संगठन राष्ट्र और समाज के लिए नैतिक प्रकाश स्तंभ के रूप में कार्य करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है।

हमारा संगठन समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने में विश्वास करता है। शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, सामाजिक सुधार, कृषि, पर्यावरण और जनकल्याण से जुड़े क्षेत्रों में सक्रिय सहभागिता के माध्यम से हम एक जागरूक, जिम्मेदार और नैतिक समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्यरत हैं। हमारा उद्देश्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से लागू कराना और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

GNF — भारतरत्न नंदा नैतिक ‘ज्योति’ प्रतीक चिह्न
पंजीकृत संस्थाGovt. of India · 1994
SR Act XXI of 1860
उद्देश्य

उद्देश्य एवं संकल्प

नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों का प्रसार।

संगठन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना करना तथा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े महान आदर्शों को वर्तमान और भविष्य की पीढ़ी तक पहुँचाना है। हम यह मानते हैं कि जब तक समाज नैतिक रूप से मजबूत नहीं होगा, तब तक आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक विकास स्थायी नहीं हो सकता।

हमारा संकल्प है कि समाज में व्याप्त बुराइयों के विरुद्ध जनजागरूकता उत्पन्न की जाए और नागरिकों को उनके कर्तव्यों के प्रति सजग किया जाए। प्रतिभाशाली युवाओं को सही दिशा प्रदान करना, उन्हें नशा, हिंसा, अनैतिकता और भटकाव से दूर रखते हुए राष्ट्र निर्माण से जोड़ना संगठन का एक प्रमुख उद्देश्य है।

इसके अतिरिक्त, संगठन आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक खुशहाली के लिए स्वैच्छिक योजनाओं का निर्माण करता है। इन योजनाओं के माध्यम से हुनरबाज और प्रतिभाशाली व्यक्तियों को राष्ट्र उन्नति में सहभागी बनाया जाता है तथा उनके योगदान को सम्मान और प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। हमारा विश्वास है कि जब समाज की प्रतिभाओं को सही मंच और सम्मान मिलता है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है।

भारत रत्न श्री गुलज़ारीलाल नंदा
जन्म4 जुलाई 1898, सियालकोट
भारत रत्न1997
कार्यवाहक प्रधानमंत्री1964 एवं 1966
निधन15 जनवरी 1998
हमारी प्रेरणा

प्रेरणा स्रोत — गुलज़ारीलाल नंदा

इस संगठन की वैचारिक और नैतिक प्रेरणा भारत रत्न श्री गुलज़ारीलाल नंदा जी के जीवन, कार्य और विचारों से प्राप्त होती है। नंदा जी सादगी, ईमानदारी, त्याग और राष्ट्रसेवा के प्रतीक थे।

उन्होंने अपने शासनकाल में नैतिकता और जनहित को सर्वोच्च स्थान दिया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सत्ता और पद के साथ भी मूल्य और सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।

संगठन का उद्देश्य नंदा जी के शासन कार्यकाल में बनी और चलाई गई जनकल्याणकारी नीतियों, विचारधाराओं और व्यवस्थाओं को आगे लाना है, ताकि वर्तमान सरकारों और योजनाओं में भी नैतिक दृष्टिकोण को समाहित किया जा सके। नंदा जी द्वारा स्थापित संस्थाओं, परंपराओं और आदर्शों को एकजुट कर राष्ट्रहित के कार्यों को और अधिक मजबूत बनाना भी संगठन का प्रमुख लक्ष्य है।

हम मानते हैं कि नंदा जी की विरासत केवल इतिहास नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है, जिसे सुरक्षित रखना और आगे बढ़ाना समाज का नैतिक दायित्व है।
हमारे मूल्य

नैतिक मूल्य एवं विचारधारा

संगठन की विचारधारा सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, सेवा, समानता और राष्ट्रहित पर आधारित है।

सत्य

अहिंसा

ईमानदारी

सेवा

समानता

राष्ट्रहित

हम यह मानते हैं कि समाज की उन्नति तभी संभव है जब व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर सामाजिक और राष्ट्रीय हित के बारे में सोचे।

हम सामाजिक बुराइयों—जैसे भ्रष्टाचार, अनैतिक आचरण, नशाखोरी, भेदभाव और शोषण—के विरुद्ध समाज को जागृत करने का कार्य करते हैं। साथ ही, ऐसे ठोस कानूनों, नीतियों और व्यवस्थाओं को समर्थन प्रदान करते हैं जो समाज को नैतिक रूप से मजबूत बनाती हों।

संगठन आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक तथा अन्य भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के विकास और प्रचार पर विशेष जोर देता है। जैविक खेती, जैविक राज्य की अवधारणा, गौधन संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को हम राष्ट्र के दीर्घकालीन कल्याण से जोड़कर देखते हैं।

भारतीय संस्कृति, परंपरा और आदर्श धर्म स्थलों को पर्यटन एवं सांस्कृतिक विरासत के रूप में विकसित करना, ताकि समाज का नैतिक स्तर गिरावट से बचा रहे, संगठन की विचारधारा का अभिन्न अंग है। साथ ही, खाद्यान्न योजनाओं में पारदर्शिता, जनहित योजनाओं की नैतिक मजबूती और शासन व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संगठन सक्रिय भूमिका निभाता है।

सहभागिता

सम्मान, सहभागिता और राष्ट्र निर्माण

संगठन भारत रत्न नंदा जी की स्मृति में नैतिक सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित करता है, जो देश के कल्याण, सुरक्षा और सामाजिक उन्नति में उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। हमारा मानना है कि सम्मान और प्रोत्साहन से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और अन्य लोग भी राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित होते हैं।

यह प्रतिष्ठान केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन है, जो समाज को जोड़ने, जागृत करने और राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनाने का कार्य कर रहा है। हमारा संकल्प है कि हम निरंतर ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिकता के साथ कार्य करते हुए एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान दें, जो सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली, सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण और नैतिक रूप से सशक्त हो।

मिशन एवं विज़नहमारे कार्यक्रम

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स्वयंसेवक बनें, सदस्य बनें या अपना सहयोग दें — आपका हर योगदान समाज और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक कदम है।